आवास ऋण पर भुगतान दिखाते हुए आप कर अनुलाभ प्राप्त कर सकते हैं । ऐसा करने के लिए, आपको आय कर प्रमाण-पत्र प्राप्त करना होगा जो आपको वर्ष में एक बार जारी किया जाएगा ।  इसमें ब्याज और वर्ष के दौरान पुनर्भुगतान की गई पूँजी की कुल राशि शामिल होगी ।  स्वयं के अधिकार की संपत्ति के संबंध में कर अनुलाभ का दावा करने के लिए यह अनिवार्य है ।

आपको यह अपनी निजी आय कर विवरणी के भाग के रूप में प्रस्तुत करना होगा और उसके बाद अपनी देयता का परिकलन करना होगा ।

वित्तीय वर्ष के चालू नियमों के तहत स्वीकार्य अधिकतम राशि की जाँच करना याद रखें ।

क. कर अनुलाभ

I . आय कर अधिनियम 1961 के तहत

क) आवास ऋणों का उधार लेने वालों को अनुलाभ :
i.) आय कर अधिनियम, 1961 की धारा 24(बी) के दूसरे प्रावधान के तहत, अप्रैल, 1999 के पहले दिन के बाद से गृह संपत्ति के अधिग्रहण / निर्माण के प्रयोजनार्थ प्राप्त किए गए ऋण पर अदा किए गए ब्याज के रूप में रु. 1,50,000/- की राशि कटौती के लिए उपलब्ध है बशर्ते कि ऐसा निर्माण / अधिग्रहण पूँजी को उधार लेने की तारीख से 3 वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाता है ।

ii.) यदि उधार की राशि में से संपत्ति अर्जित / निर्मित की जाती है, तो अवधि जिसमें ऐसी संपत्ति अर्जित या निर्मित की गई है, से पूर्व की अवधियों के लिए ऐसे ऋण पर ब्याज की कटौती चार तुरंत अनुवर्ती वर्षों के साथ निर्माण / अधिग्रहण के वर्ष से समान किस्तों में की जाएगी ।

iii.) ऊपर क्र.सं. (i) और (ii) में दर्शित कटौती केवल तभी अनुमत होगी जब उधार लेने वाला व्यक्ति उधार ली गई राशि और संपत्ति के अधिग्रहण / निर्माण के लिए प्रदेय ब्याज को दर्शाते हुए एक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करता है ।

iv.) आवास ऋण पर मूल पुनर्भुगतान व्यक्तियों और हिन्दु अविभाजित परिवार के लिए आय कर अधिनियम, 1961 की धारा 80सी के तहत रु. 1,00,000/- तक की सीमा तक कटौती योग्य है |

II. संपत्ति कर अधिनियम, 1957

क)  संपत्ति कर अधिनियम, 1957 के तहत, धारा 5(1) में उल्लिखित है कि करदाता स्वयं के अधिकार की संपत्ति के रूप में एक संपत्ति धारित कर सकता है और यही संपत्ति, संपत्ति कर के लिए दायी पात्र आस्तियों से छूट प्राप्त होगी ।

ख)यदि एक करदाता, एक से अधिक संपत्ति धारित करता है, तो संपत्ति कर के प्रयोजनार्थ दूसरी संपत्ति का मूल्यांकन संपत्ति कर नियम 1958 के अनुसार किया जाना है और रु. 15,00,000/- से अधिक मूल्य की संपत्ति पर संपत्ति कर देना होगा ।  बहरहाल, यदि कथित आस्ति के समक्ष कोई देयता है, तो कर योग्य संपत्ति का परिगणन करने से पहले उसकी कटौती की जानी है ।

ग)  यदि करदाता एक से अधिक संपत्ति धारित करता है और दूसरी संपत्ति को पिछले वर्ष 300 से अधिक दिनों के लिए किराए पर दिया है, तो ऐसी संपत्ति कर योग्य संपत्ति के परिगणन के लिए पात्र आस्ति नहीं मानी जाएगी ।

. कर के निहितार्थ

यदि संपत्ति जिस पर धारा 80सी के तहत कटौती का दावा किया गया है, वित्तीय वर्ष जिसमें उनके द्वारा ऐसी संपत्ति पर अधिकार प्राप्त किया गया है, के समाप्त होने से 5 वर्ष समाप्त होने से पहले करदाता द्वारा हस्तांतरित की जाती है तो हस्तांतरण के वर्ष में कोई कटौती अनुमत नहीं होगी और पहले से अनुमत कटौती को हस्तांतरण के वर्ष में करदाता की आय में जोड़ा जाएगा और तदनुसार उस पर कर लगाया जाएगा ।

कंपनी और उसके शेयरधारकों को कर अनुलाभ

कंपनी के निवासी सदस्य के लिए

ख. आय कर अधिनियम, 1961 के तहत

1.) देशीय कंपनियों से प्राप्त लाभांश आय, आय कर अधिनियम, 1961 की धारा 10(34) के तहत छूट प्राप्त है । .

2.) शेयरधारक निम्नलिखित शर्तों को पूरा करने की शर्त पर, अधिनियम की धारा 10(38) के आधार पर बारह महीनों से अधिक अवधि के लिए उनके द्वारा धारित कंपनी के शेयरों के संबंध में दीर्घकालीन पूँजी लब्धि कर का भुगतान करने के लिए दायी नहीं हैं :

(क) ऐसे इक्विटीशेयरके विक्रय का लेन-देन 1 अक्तूबर, 2004 को या उसके बाद दर्ज किया गया है ।

(ख) ऐसा लेन-देन वित्त (सं.2) अधिनियम, 2004 के अध्याय VII के तहत प्रतिभूति लेनदेन कर के लिए प्रभार-योग्य है ।इस धारा के उपबंध में यह विनिर्दिष्ट है कि व्यक्ति और हिन्दू अविभाजित परिवार के मामले में, जहाँ ऐसी अल्पकालीन पूँजीगत लब्धियों द्वारा घटाए गए अनुसार कुल आय अधिकतम राशि जो कर लगाने योग्य नहीं है, तो ऐसी अल्पकालीन पूँजीगत लब्धियों को उस राशि तक घटाया जाएगा जहाँ तक इस प्रकार घटाई गई कुल आय, अधिकतम राशि तक कम पड़ती है जिस पर कर नहीं लगाया जाना है और ऐसी अल्पकालीन पूँजीगत लब्धियों के शेष पर कर का परिगणन दस प्रतिशत की दर पर किया जाएगा

3.) कंपनी के शेयरों के हस्तांतरण से सृजित अल्पकालीन पूँजीगत लब्धियों पर धारा 111ए के आधार पर 10% की दर से (तथा लागू अधिभार एवं शिक्षा उपकर) कर लगाया जाएगा यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी की जाती हैं  :

(क) ऐसे इक्विटी  शेयर के विक्रय का लेन-देन 1 अक्तूबर, 2004 या उसके बाद दर्ज किया जाता है ।

(ख) ऐसा लेन-देन वित्त (सं.2) अधिनियम, 2004 के अध्याय VII के तहत प्रतिभूति लेनदेन कर के लिए प्रभार-योग्य है ।

इसके अतिरिक्त, कंपनी के शेयरों का पब्लिक इश्यू भी पूँजी का अर्ह इश्यू माना जाता है और दीर्घकालीन पूँजीगत लब्धियाँ अधिनियम की धारा 54ईडी के अनुलाभ के लिए अर्ह होंगी यदि पूँजीगत लब्धियों को कंपनी के शेयरों में निवेश किया जाता है ।

 

संपत्ति कर अधिनियम, 1957 के तहत ।

देशीय कंपनी में धारित शेयर संपत्ति कर अधिनियम, 1957 के तहत “आस्ति” नहीं होते, इसलिए, कथित शेयरों के धारक के हाथों में संपत्ति कर के लिए दायी नहीं हैं ।

कंपनी के गैर-आवासी सदस्यों के लिए

ग. आय कर अधिनियम, 1961 के तहत

1.) अधिनियम की धारा 115ई के तहत, जहाँ कंपनी में शेयर किसी गैर-आवासी भारतीय द्वारा परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में अर्जित या अभिदत्त हैं, 12 महीनों से अधिक अवधि के लिए धारित शेयरों के अंतरण पर गैर-आवासी भारतीय के लिए सृजित, अधिनियम की पूँजीगत लब्धियों को 10% की दर से (तथा लागू अधिभार एवं शिक्षा कर) रियायती आधार पर कर लगाया जाएगा । (अधिनियम की धारा 115डी के प्रावधानों का भी संदर्भ लिया जा सकता है)

2.) आय कर अधिनियम, 1961 की धारा 115एफ के तहत, ऊपर क्र.सं. 1.) में संदर्भित दीर्घकालीन पूँजीगत लब्धि पूरी तरह / आनुपातिक रूप से आय कर से छूट प्राप्त होगी यदि करदाता अंतरण की तारीख से 6 महीनों के भीतर आय कर अधिनियम, 1961 की धारा 115सी(एफ) में यथा परिभाषित विनिर्दिष्ट आस्तियों में पूरा या निवल प्रतिफल का भाग निवेश करता / करती है । बहरहाल, इस प्रकार छूट प्राप्त राशि, धारा 115एफ(2) के प्रावधानों के तहत कर के लिए प्रभार-योग्य होगी यदि विनिर्दिष्ट आस्तियों को कथित धारा में विनिर्दिष्टानुसार उसके अधिग्रहण की तारीख से तीन वर्षों के भीतर अंतरित किया जाता है या धनराशि में परिवर्तित किया जाता है ।

3.) अधिनियम की धारा 115जी के प्रावधानों के तहत, गैर-आवासी भारतीय के लिए अपनी आय की विवरणी प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा यदि उसकी आय का एकमात्र स्रोत परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में अर्जित, खरीदी गई या अभिदत्त आस्तियों से सृजित निवेश आय या दीर्घकालीन पूँजीगत लब्धि है अथवा दोनों हैं और उससे स्रोत पर कटौती-योग्य कर की कटौती कर ली गई है ।

4.) अधिनियम की धारा 115-I के अनुसार, एक गैर-आवासी भारतीय (यानी एक ऐसा व्यक्ति जो भारत का नागरिक है या जो भारतीय मूल का व्यक्ति है और “आवासी” नहीं है)  जो आय कर अधिनियम, 1961 के अध्याय XII-ए के प्रावधानों द्वारा नियंत्रित न होने का विकल्प लेता है, तो अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अनुसार उसकी कुल आय का परिगणन किया जाएगा और प्रभारित किया जाएगा ।

5.) अधिनियम की धारा 10(34) के आधार पर, अधिनियम की धारा 115-ओ में सदर्भित किसी देशीय कंपनी से लाभांश आय के माध्यम से अर्जित आय शेयरधारकों के हाथ में कर से छूट प्राप्त है ।

6.) जहाँ भारत द्वारा किसी अन्य देश के साथ किए गए किसी द्वि कराधान निवारण करार [डीटीए] में कंपनी के शेयरों में निवेश से आय के संबंध में रियायती कर दर या छूट का प्रावधान किया गया है, तो  ऐसे अनुलाभी प्रावधान इस संबंध में आय कर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों पर प्रचलित होंगे ।

संपत्ति कर अधिनियम, 1957 के तहत ।

देशीय कंपनी में धारित शेयर संपत्ति कर अधिनियम 1957 के तहत “आस्ति” नहीं हैं, इसलिए, कथित शेयरों के धारक के हाथों में संपत्ति कर के लिए दायी नहीं हैं ।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लिए

घ. आय कर अधिनियम, 1961 के तहत

1.) अधिनियम की धारा 115एडी (1) (बी) (ii) के तहत, बारह महीनों से कम अवधि के लिए कंपनी में धारित शेयरों के अंतरण से सृजित अल्पकालीन पूँजीगत लब्धि के माध्यम से प्राप्त आय पर 30% की दर (तथा लागू अधिभार) से कर लगाया जाएगा ।

2.) अधिनियम की धारा 115एडी (1) (बी) (iii) के तहत, कंपनी में धारित शेयरों के अंतरण से सृजित दीर्घकालीन पूँजीगत लब्धि के माध्यम से प्राप्त आय पर 10% की दर (तथा लागू अधिभार) से कर लगाया जाएगा ।

3.) कंपनी के शेयरों पर प्राप्त लाभांश के माध्यम से प्राप्त आय आय कर अधिनियम, 1961 की धारा 10(34) के तहत छूट प्राप्त है ।

4.) जहाँ भारत द्वारा किसी अन्य देश के साथ किए गए किसी द्वि कराधान निवारण करार [डीटीए] में कंपनी के शेयरों में निवेश से आय के संबंध में रियायती कर दर या छूट का प्रावधान किया गया है, तो  ऐसे अनुलाभी प्रावधान इस संबंध में आय कर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों पर प्रचलित होंगे ।

टिप्पणियाँ :

i) उपरोक्त सभी अनुलाभ वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा यथा संशोधित, मौजूदा कर नियमों के अनुसार हैं ।

ii) कंपनी और उसके शेयरधारकों के लिए उपलब्ध कर अनुलाभों की वर्तमान स्थिति केवल सामान्य सूचना के प्रयोजनार्थ दी गई है । वैयक्तिक प्रकृति के कर परिणामों की दृष्टि से, प्रत्येक निवेशक को परामर्श दिया जाता है कि वे इश्यू में अपनी सहभागिता के विशिष्ट कर परिणामों के संबंध में अपने कर सलाहकार से सलाह लें ।

iii) ऊपर सूचीबद्ध कर अनुलाभ सर्वसमावेशी नहीं हैं और कंपनी से प्राप्त सूचनाओं, स्पष्टीकरणों और अभ्यावेदनों पर आधारित हैं और कंपनी के कारोबारी कार्यकलापों और प्रचालनों की हमारी समझ पर आधारित हैं । जबकि इस विचार को स्थापित करने में सभी उचित ध्यान रखे गए हैं, एम.पी. चिताले एंड कंपनी इसमें किसी त्रुटि या विलोपन के लिए अथवा इन पर विश्वास करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा कोई हानि वहन किए जाने की परिस्थिति में कोई उत्तरदायित्व स्वीकार नहीं करती ।

iv) जब तक कि अन्यथा विनिर्दिष्ट न हो, संदर्भित धाराएँ आय कर अधिनियम, 1961 (दि एक्ट) की धाराएँ हैं ।

कंपनी के लिए

क. आय कर अधिनियम, 1961 के तहत

1. आय कर अधिनियम, 1961 की धारा 112 के प्रावधानों के अनुसार और उनकी शर्तों पर, कंपनी को प्रोद्भूत दीर्घकालीन पूँजीगत लब्धियाँ कंपनी के लिए लागू 35% की सामान्य दर (तथा लागू अधिभार) के स्थान पर नीचे दर्शित कर पर निर्भर करेंगी ।

  • यदि दीर्घकालीन पूँजीगत लब्धि का परिगणन 20% (तथा लागू अधिभार) के सूचीकरण से किया गया है।
  • यदि दीर्घकालीन पूँजीगत लब्धि का परिगणन 10% (तथा लागू अधिभार) के सूचीकरण के बिना किया गया है।

कंपनी धारा 54ईसी और 54ईडी के तहत दीर्घकालीन पूँजीगत लब्धियों पर कर के संबंध में छूट का दावा करने के लिए पात्र है यदि पूँजीगत लब्धियों की राशि संबंधित धाराओं में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने पर, कुछेक विनिर्दिष्ट बाँड / प्रतिभूतियों में निवेश की जाती है ।

2. कंपनी निम्नलिखित शर्तों को पूरा करने पर, अधिनियम की धारा 10(38) के आधार पर, कंपनी द्वारा बारह महीनों से अधिक की अवधि के लिए धारित कंपनी के शेयरों के संबंध में दीर्घकालीन पूँजीगत लब्धि कर का भुगतान करने के लिए दायी नहीं है -

 

(क) ऐसे इक्विटी शेयर की बिक्री का लेन-देन 1 अक्तूबर, 2004 या उसके बाद दर्ज किया जाता है ।

(ख) ऐसा लेन-देन वित्त (सं.2) अधिनियम, 2004 के अध्याय VII के तहत प्रतिभूति लेन-देन कर के लिए प्रभार-योग्य है ।

3. कंपनी के शेयरों के हस्तांतरण से सृजित अल्पकालीन पूँजीगत लब्धियों पर धारा 111ए के आधार पर 10% की दर से (तथा लागू अधिभार एवं शिक्षा उपकर) कर लगाया जाएगा यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी की जाती हैं

(क) ऐसे इक्विटी शेयर के विक्रय का लेन-देन 1 अक्तूबर, 2004 या उसके बाद दर्ज किया जाता है ।

(ख) ऐसा लेन-देन वित्त (सं.2) अधिनियम, 2004 के अध्याय VII के तहत प्रतिभूति लेन-देन कर के लिए प्रभार-योग्य है ।

4. अनवशोषित कारोबार के अनुलाभ / दीर्घकालीन पूँजीगत हानियाँ एवं भत्ते

कंपनी में अधिनियम के तहत अनवशोषित हानियाँ / भत्ते हैं जिन्हें नीचे दिए गए अनुसार भावी वर्षों में आय के समक्ष शुरु करने के लिए आगे ले जाया जा सकता है -

i.अधिनियम की धारा 72 के अनुसार, कंपनी अनवशोषित हानियों को उनके पहले परिगणन के निर्धारण वर्ष के ठीक बाद के आठ निर्धारण वर्षों की अवधि के लिए आगे ले जा सकती है ।

ii.अधिनियम की धारा 32 के अनुसार, कंपनी पूर्व के वर्षों के अनवशोषित मूल्यह्रास भत्ते को अधिनियम के तहत भावी वर्षों में आय के समक्ष शुरू करने के लिए अनिश्चित अवधि के लिए आगे ले जा सकती है |

iii. अधिनियम की धारा 74 के अनुसार, कंपनी अनवशोषित दीर्घकालीन पूँजीगत हानियों को उस निर्धारण वर्ष जिसमें ऐसी हानि का परिगणन पहली बार किया गया, में निर्धारण वर्ष के ठीक बाद के आठ निर्धारण वर्षों की अवधि के लिए अधिनियम के तहत भावी वर्षों के लिए आगे ले जा सकती है ।

5. कंपनी लंबी अवधि के वित्त μ प्रदान करने के व्यवसाय से अपने लाभ का 40% की कटौती करने का हकदार है / एस 36 (1) ( आठ) आयकर अधिनियम, 1961की कटौती इस शर्त के अधीन है ने कहा कि कंपनी कटौती की सीमा तक एक विशेष रिजर्व बनाने और बनाए रखने के लिए आवश्यक है । इस तरह के आरक्षित करने के लिए किए गए कुल राशि चुकता शेयर पूंजी और कंपनी के जनरल भंडार का दो बार राशि से अधिक है , कटौती इस तरह की राशि केवल के लिए प्रतिबंधित है ।

6. देशीय कंपनियों से प्राप्त लाभांश आय, आय कर अधिनियम, 1961 की धारा 10(34) के तहत छूट प्राप्त है ।

7. अधिनियम की धारा 10(35) के प्रावधानों के अनुसार तथा उनकी शर्त पर, कंपनी के अधिकार में निम्नलिखित आय छूट प्राप्त होगी -

i) अधिनियम की धारा 10 के खंड (23डी) के तहत विनिर्दिष्ट म्युच्युअल फंड की यूनिटों के संबंध में प्राप्त आय; या

ii) विनिर्दिष्ट उपक्रम के प्रशासक से यूनिटों के संबंध में प्राप्त आय; या

iii) विनिर्दिष्ट कंपनी से यूनिटों के संबंध में प्राप्त आय ।

 

संपत्ति कर अधिनियम, 1957 के तहत ।

कंपनी रु. 15 लाख की मूल छूट सीमा की शर्त पर, कंपनी के स्वामित्व की कुछेक आस्तियों के संबंध में 1% की दर से, संपत्ति कर अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के अनुसार संपत्ति कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है ।

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