हममे से अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि दी जाने वाली ऋण की राशि का निर्णय कैसे लिया जाता है । कभी-कभी हम देखते हैं कि एक ही फर्म में काम करने वाले और समान वेतन पाने वाले दो लोगों को दी जाने वाली ऋण की राशि में बहुत अंतर होता है । यह कैसे संभव है?

ऋण की पात्रता दो अलग-अलग परिगणनों पर आधारित होती है ।

  1. ऋण का चुकौती करने की वह राशि जो आप प्रत्येक महीने वहन कर सकते हैं ।
  2. संपत्ति की लागत का प्रतिशत ।

आइए, हम पहले परिगणन को देखें जो कि चुकतान की क्षमता है ।

चुकौती करने की क्षमता आपकी कुल आय और व्यय पर आधारित है । मान लीजिए कि आपकी मासिक आय रु. 20,000 है और आपके मासिक खर्च रु. 12,000 हैं, तो आप लिए गए किसी ऋण की ओर रु. 8,000 का भुगतान कर सकते हैं । इस संख्या को तब पात्रता राशि का परिकलन करने के लिए ऋण की समय-अवधि पर उल्टा परिकलित किया जाता है ।  स्पष्ट है कि आपकी चुकौती क्षमता अधिक होने से आपकी ऋण पात्रता भी अधिक होगी ।

क्या यह उतना आसान है ?

जी नहीं ।  लेकिन यही आधार है ।  चुकौती क्षमता को अन्य कारक भी प्रभावित कर सकते हैं ।  जैसे, यदि आप हर महीने भुगतान किए जाने वाले रु. 2,000 का किराया बचा सकते हैं क्योंकि अब आपका अपना घर है, तो आपकी चुकौतीक्षमता (रु. 8,000 + रु. 2,000) हो जाएगी, जिससे ऋण के रूप में ली जाने वाली राशि अच्छी-खासी बढ़ जाएगी । इसके अलावा, उसी आय के लिए, अधिक समय-अवधि के ऋण के लिए ऋण की पात्रता भी बढ़ती है चूँकि उसी राशि के लिए चुकौती अधिक लंबी समय-अवधि में बँट जाता है ।

आय की राशि किसे माना जाता है ?

उधार लेने वाले व्यक्ति की आय का परिकलन करने के लिए कुछ आधारभूत नियम नीचे दिए गए हैं ।  आम तौर पर निम्नलिखित को आय के वर्ग में नहीं लिया जाता ।

  • चिकित्सा प्रतिपूर्ति, कार्य-निष्पादन बोनस, या एलटीए क्योंकि ये मदें निरंतर अवधियों या निश्चित राशियों में उपलब्ध नहीं होते ।
  • ब्याज से आय, जब तक कि इसे सिद्ध नहीं किया जा सकता कि उसका स्रोत, आय का नियमित स्रोत है ।
  • इन्हीं कारणों से समयोपरि को भी आय नहीं माना जाता ।
  • गैर-सत्यापनीय स्रोतों से प्राप्त कोई अर्जन जैसे व्यय के वाउचर, किराए की आय आदि, जब तक कि ऐसे स्रोत का दस्तावेजी साक्ष्य जो सतत् और स्थिर हो, प्रस्तुत नहीं किया जाता ।

स्व-नियोजित पेशेवरों के लिए, कुछेक दस्तावेज अलग हो सकते हैं और मापन अलग हो सकते हैं  ।

संपत्ति के संयुक्त-स्वामित्व के मामले में, आवेदक और सह-आवेदक दोनों की आय को जोड़कर चुकतान क्षमता अभिनिश्चित की जाती है ।

विद्यमान ऋण

यदि आपका कोई विद्यमान ऋण है, तो वह आपकी चुकौती क्षमता को प्रभावित करेगा चूँकि आपकी प्रयोज्य आय (ऊपर दिए गए उदाहरण में रु. 8,000) विद्यमान ऋण पर ईएमआई की राशि तक घटेगी ।  बहरहाल, ज्यादातर 6 महीनों तक के अल्पकालीन ऋणों को इसके लिए विचार में नहीं लिया जाता  ।

समय-अवधि

चूँकि आपने यह समझ लिया है कि अधिक लंबी समय-अवधि के लिए ऋण पात्रता राशि बढ़ाई जा सकती है, इस मार्ग की सीमाओं को समझना महत्वपूर्ण है ।

उपलब्ध ऋण की अधिकतम समय-अवधि आवेदन करते समय आपकी आयु पर आधारित होती है । वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए यह आयु 58 वर्ष / 60 वर्ष (चूँकि आपकी फर्म में सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित हो सकती है) और स्व-नियोजित पेशेवरों के लिए 65 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए ।

इस बात को ध्यान में रखते हुए, अधिकतम संभावित समय-अवधि के लिए ऋण लेने से अधिकतम राशि की पात्रता सुनिश्चित होगी ।

हमारे पास एक ईएमआई टूल है जो आपके मासिक चुकौती के विकल्पों के लिए एक अनुमानित संख्या प्राप्त करने में आपकी मदद करेगा ।

सटीक राशि के लिए, कृपया हमें कॉल करें या हमसे मिलें, हमें आपके लिए, आपके विवरणों का परिकलन करने में खुशी होगी  ।

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